भिरखी श्मशान घाट पर कभी नहीं बहे इतने आंसू
कोरोना से पहले मधेपुरा-सहरसा रोड स्थित भिरखी श्मशान घाट पर महीने भर में पांच से छह लाशें जलती थी। बुजुर्गों की मौत के बाद यहां स्थानीय लोग आते थे। पर कोरोना काल में लगातार अपने परिजनों को खो रहे लोग यहां आकर दाह संस्कार कर रहे हैं और उनके आसुंओं से हर वक्त श्मशान घाट का माहौल गंभीर बना रहता है। हालत यह है कि मधेपुरा में इलाज कराने आने वाले कई लोग अपने प्रिय जनों की मौत के बाद शव को अपने गांव ले जाने के बजाय भिरखी घाट पर ही दाह-संस्कार कर देते हैं। ऐसा ही एक मामला गुरुवार को भिरखी घाट पर देखने को मिला।
लावारिश लाश का भी किया जाता है दाह- संस्कार : कुछ ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं कि कोरोना से मौत होने के बाद लोग शव छोड़ कर चले जाते हैं। बल्कि भिरखी घाट के पास ही नदी में शव को फेंकने का भी मामला सामने आ चुका है। ऐसी घटना न हो इसके लिए प्रशासन की तरफ से दाह- संस्कार की भी व्यवस्था की गयी है। इनदिनों तीन- चार शव हरदिन पहुंचते हैं। बीडीओ आर्य गौतम ने बताया कि भिरखी घाट पर लावारिश शव के दाह- संस्कार के लिए लकड़ी की व्यवस्था की गयी है।
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