मधेपुरा। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज कराने पहुंचने वाले मरीजों की जेब दवा खरीदने में ढीली हो रही है। डॉक्टरों की लिखी दवा अस्पताल मे नहीं मिलने के कारण उन्हें बाहर से खरीदनी पड़ रही है। शनिवार को कई मरीजों के परिजनों ने अस्पताल की अव्यवस्था पर नाराजगी जतायी। कहा कि मामूली दवा भी दुकानों से खरीदनी पड़ रही है।उदाकिशुनगंज के मंजोरा वार्ड 11 निवासी श्यामचंद्र सिंह ने कहा कि उनकी पत्नी सुशीला देवी का मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। पैर फिसलने के कारण उनकी कमर के पास का कुल्हा टूट गया था। पांच दिन तक उदाकिशुनगंज में ही इलाज कराया। शनिवार को उनको लेकर इलाज कराने मेडिकल कॉलेज पहुंचे। श्यामचंद्र सिंह कहा कि हड्डी रोग विशेषज्ञ एक्सरे करने के बाद बताया कि उनकी हड्डी टूट गयी है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ऑपरेशन की सुविधा नहीं रहने का हवाला देते हुए उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। डॉक्टर ने ओपीडी के पुर्जा पर जरूरत के अनुसार आठ- नौ तरह की दवाइयां लिखी। उनमें से एक भी दवा उन्हें मेडिकल कॉलेज में नहीं मिली। यहां तक कि डायलोना जो दर्द की दवा है वह बाहर से लाने को कहा गया और उल्टी की दवा ओएंडएम भी बाहर से ही लाने को कहा गया।
मधेपुरा / जिले में गुरुवार को यास तूफान के दस्तक के बाद लगातार रुक रुक हो रहे बारिश ने शहर का सूरत बिगाड़ कर रख दिया है. मुख्य मार्ग से लेकर गली गली में पानी लगा हुआ है जिससे भारी परेशानी का सामना करना पर रहा है. हर ओर केवल पानी ही पानी नजर आ रहा है. नियमित सापफ सफाई के अभाव में वर्षों से जाम पड़े नाला के कारण पानी निकासी में भी समस्या हो रही है. लगातार दो दिन से रुक रुक कर हो रही लगातार बारिश ने नगर परिषद और सरकार की लचर व्यवस्था का पोल खोलकर रख दिया है. एक तरफ जहां गली मुहल्ले तथा सरकारी कार्यालय परिसर नदी में तब्दील नजर आ रहा है, वहीं जिला मुख्यालय से गुजरने वाली एनएच 106 एवं 107 का निर्माण कार्य वर्षो से अबरुद्ध रहने के कारण बीच सड़क पर पानी जमा हो जाने से लोगों को आवागमन में भाड़ी परेशानी हो रही है।हैरत की बात तो यह है कि शहर से गुजरने बाली एनएच पर जमा पानी के लिए निर्माण एजेंसी के इंजीनियर मीमांसा तोमर जहां जिला प्रसाशन को दोषी और लापरवाह बता रहें हैं वहीं एनएच के सहायक अभियंता अनिल कुमार कह रहे हैं कि सिर्फ बिहार सरकार के अधिकारी और स्थानीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेस करते रहते हैं तो ...
मधेपुरा: मंगलवार को जिला मुख्यालय के राजकीयकृत केशव बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के परिसर में राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक क्षेत्र में काम करने वाली संस्था सृजन दर्पण के कलाकारों ने 'आनंदी का संदेश' नामक नाटक का संदेशप्रद मंचन कियाा. नाटक में खासकर दिखाया गया कि शिक्षा के अभाव के कारण नायिका आनंदी में स्वास्थ्य और पोषण संबंधी गलत अवधारणाएँ बन जाती है. सहज ही अंधविश्वास और पाखंड के प्रति आस्था उत्पन्न हो जाती है. नवजात बच्चे की अशिक्षा के कारण असमय देहांत हो जाती है. विज्ञापन नाटक के दूसरे हिस्से में आनंदी बैन जब पति की प्रेरणा से पढ़ाई शुरू कर अंततः डाक्टर बनकर विदेश से आती है तो बहुत से महिलाओ का उद्घारक बनती है. एक अशिक्षित अबोध बालिका से सुशिक्षित डाक्टर तक का संधर्षपूर्ण सफ़र उनके जीवनगाथा को समस्त बालिका के लिए प्ररेणा बना देती है. कैसे शिक्षा अंधविश्वास और पाखंड के कुहासा भरे लोक को खत्म कर जीवन-जगत के ...
देवाशीष याादव। अपने नेत्रहीन माता-पिता की इकलौती संतान नौ माह के कृशु की दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल में कोविड-19 के कारण मौत हो गई जबकि उसका पिता एक अन्य अस्पताल में संक्रमण से जूझ रहा है। पूर्व भाजपा विधायक जितेंद्र सिंह 'शंटी' ने गुरुवा शाम को पुरानी सीमापुरी के एक शवदाहगृह में कृशु को दफनाया। दो दिनों में यह दूसरी बार है जब सिंह ने इतने छोटे बच्चे को दफनाया है। कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान 2,000 से अधिक अनजान लोगों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर चुके सिंह (59) ने बुधवार शाम को उसी जगह के पास पांच महीने की परी को दफनाया था जहां कृशु अब हमेशा के लिए सो गया है। कृशु के एक रिश्तेदार ने बताया कि वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान था जो पूर्वी दिल्ली में दिलशाद गार्डन में रहते हैं। उन्होंने रोते हुए कहा कि दोनों माता-पिता नेत्रहीन हैं। रिश्तेदार ने बताया कि कृशु की मां करीब 18 दिन पहले कोरोना वायरस से संक्रमित हुई थी और चूंकि उसने बच्चे को स्तनपान कराया था तो वह भी बीमार हो गया। कुछ दिनों पहले कृशु को गुरु तेग बहादुर अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां बृहस्पतिवार ...
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